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एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चों को घर में रखना मुश्किल है वो खेलने के लिए बाहर जाते ही हैं. वो किसी के कॉन्टैक्ट में भी आ सकतें हैं. ऐसे में घर के अंदर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस व्यापक रूप से देश भर में फैल रहा है साथ ही साथ इसका स्वरुप भी समय के साथ बदल रहा है. अब तक हम या आप ये मान के चल रहे थे के कोरोना का प्रभाव बच्चों और जवानों में कम होता है. लेकिन हाल में हुए एक सर्वे में ये पाया गया है के 5-17 साल के बच्चों के बीच कोविड-19 के सबसे ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं.

33 लाख के पार पहुंच चुकी है संक्रमितों की संख्या
देश भर में कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 33 लाख के पार पहुंच चुकी है और स्थिति दिन और दिन गंभीर होती जा रही है. दरअसल हाल में सामने आए सिरोलॉजिकल सर्वे के परिणाम में ये बात सामने आई के 5 से 17 साल के बच्चों में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं.

पहले ये कहा जा रहा था के कोरोना का खतरा अधिक उम्र के लोगों को है. 5 से 17 साल के 34.7% बच्चों में कोविड 19 के एंटीबॉडी थे जबकि 50 साल से अधिक आयु के 31.2% लोगों में ये एंटीबॉडी पाए गए. वहीं सर्वे के अनुसार 18-49 साल के 28.5% में कोविड-19 के एंटीबॉडी पाए गए.
29.1% लोगों में एंटीबॉडी विकसित
देश भर में बच्चों के स्कूल खोले जाने से ले कर परीक्षा पर काफ़ी बहस चल रही है लेकिन जब स्कूल बंद है ऐसे में भी बच्चें संक्रमण का शिकार हो रहें हैं तो परीक्षा या स्कूल खोलना फिलहाल उन्हें मौत के कुएं में ढ़केलने जैसा होगा. सेरो सर्वे में ये पाया गया राष्ट्रीय राजधानी में 29.1% लोगों में कोरोना के संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो गई हैं.

सर्वे में 15000 से अधिक वालंटियर्स शामिल हुए थे. जिसमें एंटीबॉडी उपस्थित होने की जांच की गई थी. इस जांच में 4 साल के बच्चों को भी शामिल किया गया था. इसमें 18 साल से कम आयु के 25%, वहीं 50% 18-50 और शेष 50 साल की उम्र से ज़्यादा के लोग शामिल थे.ये सर्वे दिल्ली के 11 ज़िलों में आयोजित किया गया था.

हर महीने सेरोलॉजिकल सर्वे करवा रही है दिल्ली सरकार
बता दें के कोरोना पर काबु पाने के लिए दिल्ली सरकार हर महीने सेरोलॉजिकल सर्वे करवा रही है. इस को एंटीबॉडी सर्वे भी कहते हैं, बीमारी के खिलाफ शरीर में पैदा हुए एंटी बॉडी का पता लगाया जाता है. इस संक्रमण से ठीक हुए लोगों में एंटी बॉडी बन जाते हैं जो शरीर की इस वायरस से लड़ने में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं.

यहीं नहीं अमेरिका में हुई एक रिसर्च के मुताबिक बच्चों के ज़रिए ये बीमारी तेज़ी से फैलती है. यानि कोरोना वायरस के बच्चों में वो संवाहक है जिसमें लक्षण नज़र नहीं आते लेकिन ये तय है के कोरोना वायरस के सामुदायिक प्रसार में बच्चों की भूमिका अनुमान से अधिक है.

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