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सावधान! मशहूर वैज्ञानिक का दावाः कोरोना अभी शुरूआती दौर में, अभी तबाही बाकी

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थय संगठन से जुड़े दुनिया के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेविड नाब्ररो ने कहा है कि कोरोना महामारी अभी सिर्फ अपने शुरूआती दौर में है. डेविड के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर आने की आशंका टली नहीं है और ये काफी खतरनाक स्थिति उत्पन्न कर सकती है.

टेलीग्राफ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेविड नाब्ररो ने ये जानकारी ब्रिटेन की संसद की हाउस ऑफ कॉमन्स फॉरेन अफेयर्स कमेटी को बताया है कि फिलहाल कोरोना वायरस को लेकर चिंता मुक्त होने से बड़ा नुकसान हो सकता है. डेविड ने कहा कि ये वक़्त राहत की सांस लेने का नहीं बल्कि आने वाली बड़ी तबाही के लिए तैयार रहने का है.

डेविड नाब्ररो विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष प्रतिनिधि हैं और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित इंपेरियल कॉलेज लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन के को-डायरेक्टर भी हैं. डेविड ने खासकर यूरोप को लेकर कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर आने पर यहां हालात बिगड़ सकते हैं. डेविड नाब्ररो विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष प्रतिनिधि हैं और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित इंपेरियल कॉलेज लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन के को-डायरेक्टर भी हैं. डेविड ने खासकर यूरोप को लेकर कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर आने पर यहां हालात बिगड़ सकते हैं.

डेविड ने ब्रिटेन के सांसदों को बताया कि चूंकि कोरोना वायरस बेकाबू हो गया था, इसलिए अब वैश्विक इकोनॉमी में न सिर्फ मंदी बल्कि इसके सिकुड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि यह किसी साइंस फिक्शन मूवी से भी खराब स्थित है. डेविड ने ब्रिटेन के सांसदों को बताया कि चूंकि कोरोना वायरस बेकाबू हो गया था, इसलिए अब वैश्विक इकोनॉमी में न सिर्फ मंदी बल्कि इसके सिकुड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि यह किसी साइंस फिक्शन मूवी से भी खराब स्थित है.

WHO के विशेष प्रतिनिधि डेविड नाब्ररो ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के दावे को भी खारिज किया कि चीन की ओर से WHO प्रमुख को खरीद लिया गया था, इसलिए संगठन कोरोना महामारी पर उचित कदम नहीं उठा सका. डेविड ने कहा है कि वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को इतना नुकसान हुआ है कि गरीबों की संख्या दोगुनी हो सकती है. उन्होंने कहा कि हम अभी महामारी के बीच में भी नहीं पहुंचे हैं, बल्कि ये तो अभी शुरुआत ही है. WHO के विशेष प्रतिनिधि डेविड नाब्ररो ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के दावे को भी खारिज किया कि चीन की ओर से WHO प्रमुख को खरीद लिया गया था, इसलिए संगठन कोरोना महामारी पर उचित कदम नहीं उठा सका. डेविड ने कहा है कि वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को इतना नुकसान हुआ है कि गरीबों की संख्या दोगुनी हो सकती है. उन्होंने कहा कि हम अभी महामारी के बीच में भी नहीं पहुंचे हैं, बल्कि ये तो अभी शुरुआत ही है.

इससे पहले WHO प्रमुख डॉ टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कि दुनिया के कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में ग़लत दिशा में जा रहे हैं. डॉ टेड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं और इससे साबित होता है कि जिन एहतियात और उपाय की बात की जा रही है, उनका पालन नहीं किया जा रहा है. इससे पहले WHO प्रमुख डॉ टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कि दुनिया के कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामले में ग़लत दिशा में जा रहे हैं. डॉ टेड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं और इससे साबित होता है कि जिन एहतियात और उपाय की बात की जा रही है, उनका पालन नहीं किया जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अगर ठोस क़दम नहीं उठाया गया तो कोरोना वायरस की महामारी बद से बदतर होती जाएगी. उत्तरी और दक्षिणी अमरीका इस महामारी की चपेट में अभी सबसे बुरी तरह से हैं. अमरीका में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राष्ट्रपति ट्रंप में चल रही तनातनी के बीच संक्रमण के नए मामले लगातार तेज़ी से बढ़ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अगर ठोस क़दम नहीं उठाया गया तो कोरोना वायरस की महामारी बद से बदतर होती जाएगी. उत्तरी और दक्षिणी अमरीका इस महामारी की चपेट में अभी सबसे बुरी तरह से हैं. अमरीका में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राष्ट्रपति ट्रंप में चल रही तनातनी के बीच संक्रमण के नए मामले लगातार तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस गेब्रेसिएस ने कहा कि बच्चों पर महामारी का सबसे खतरनाक असर होता है. हालांकि, स्कूलों को अस्थायी तौर पर उन्हीं इलाकों में बंद करना चाहिए, जहां संक्रमण का ज्यादा खतरा हो. स्कूलों को बंद करना महामारी से निपटने में सबसे आखिरी कदम होना चाहिए. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल ट्रेडोस गेब्रेसिएस ने कहा कि बच्चों पर महामारी का सबसे खतरनाक असर होता है. हालांकि, स्कूलों को अस्थायी तौर पर उन्हीं इलाकों में बंद करना चाहिए, जहां संक्रमण का ज्यादा खतरा हो. स्कूलों को बंद करना महामारी से निपटने में सबसे आखिरी कदम होना चाहिए. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए.

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