भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी योजना की घोषणा की है। सरकार ने एलान किया है कि अगर प्रदेश का कोई सरकारी कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वो अपना इलाज किसी भी निजी अस्पताल में करा सकता है, इसका भुगतान सरकार करेगी।

सरकार की घोषणा के मुताबिक सरकारी कर्मचारी और उनके परिजन कोरोना का इलाज निजी अस्पतालों में करवा सकेंगे। उनके इलाज में लगने वाली दवा फेविपिरावियर और इंजेक्शन रेमडेसिविर जैसी महंगी दवाइयों समेत पूरे इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी।

इसके लिए कर्मचारी अपना सारा हिसाब-किताब अपने विभाग के माध्यम से जिले के सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक को भेजेगा और यहीं से मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही है।

प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश में कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में बीमार होते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुबंधित 101 निजी अस्पतालों में इलाज की सुुविधा मिलेगी। वहीं अगर कोरोना मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएगी तो इसका भुगतान सरकार नहीं करेगी।

इसके अलावा कांग्रेस सरकार में 12 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और अध्यापकों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा योजना को अब संशोधित रूप में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत अफसरों से एक हजार रुपये, कर्मचारियों से 500 रुपये, चौथी श्रेणी के कर्मचारियों से 400 रुपये हर महीने बीमा के प्रीमियम के तौर पर लिए जाते, जिससे सरकार को हर साल 400 करोड़ रुपये मिलते लेकिन कर्मचारी प्रीमियम की राशि देने का तैयार नहीं हुए।

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