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जलालाबादः- मां अपने बच्चों की खुशी के लिए जिंदगी की हर खुशी कुर्बान कर देती है। लेकिन बच्चे जब बड़े होते हैं तो माता-पिता को उम्मीद होती है कि ये बच्चे हमारी जिंदगी का सहारा बनेंगे। लेकिन वर्तमान समय के अंदर कलयुगी औलाद के अंदर अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेवारी खत्म होती दिखाई दे रही है। जिसकी मिसाल विगत श्री मुक्तसर साहिब रोड पर लावारिस हालत में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हुई मौत से लगाई जा सकती है। मिली जानकारी अनुसार उक्त बुजुर्ग महिला बूड़ा गुज्जर रोड पर मिट्टी के गारे की खड़ी की 2-2 फीट की दीवारों के सहारे दिन काट रही थी और हालात इतने बुरे हो गए थे कि महिला के शरीर पर कीड़े पड़ने शुरू हो गए थे। जिसके बाद समाज सेवी संस्थाओं द्वारा इस बुजुर्ग महिला को अस्पताल में दाखिल करवाया गया लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। आप को बता दें कि बुजुर्ग महिला के बेटे बड़े-बड़े पदों पर तैनात थे और एक बेटा एक्साइज विभाग में रिटायर हो चुका है और दूसरा राजनीतक पार्टी से जुड़ा था जबकि बेटी शिक्षा विभाग में तैनात है और पौती पीसीएस एसडीएम फरीदकोट जिले में लगी है। इतने बड़े पदों पर विराजमान परिवार द्वारा एक बुजुर्ग महिला की संभाल न करना कहीं न कहीं इंसानी कदरों कीमतों को मारने वाली बात है।

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