बर्ड फ्लूः अब परिंदों की शामत

जब भारत कोविड-19 पर नियंत्रण कर ही रहा था कि 2020 के अंत में एक अन्य वायरस की खबर आई. पिछले दो हक्रतों में, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल और गुजरात में हजारों पक्षी मृत पाए गए, जो भारत में फिर से अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के प्रवेश को चिन्हित करते हैं. वायरस का यह स्ट्रेन मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, पर मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है.

संहार बर्ड फ्लू की वजह से केरल में 5 जनवरी को बत्तखों को मारने के लिए पकड़ते स्वास्थ्य कर्मचारी

पक्षियों की मौत की घटनाओं की खबर देने वाले पहले राज्य राजस्थान से 471 मृत कौओं और पांच बगूलों के सैंपल मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइ सिक्योरिटी एनिमल डिजीजेज (एनआइएचएसएडी) में जांच के लिए भेजे गए. उनसे 31 दिसंबर को मृत पक्षियों में एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि की गई.

इंदौर के डेली कॉलेज के परिसर में पाए गए 156 मृत कौवों के नमूनों की जांच के बाद एनआइएचएसएडी ने उनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि की. 3 जनवरी को 53 जल पक्षी, जिनमें कॉम्ब डक्स और बगूले शामिल थे, गुजरात के जूनागढ़ के खारो जलाशय में मृत मिले. केरल में 1,700 बत्तखों के मरने की खबर है. हरियाणा में एक महीने में लाखों मुर्गियां मरी हैं, वैसे इनके बर्ड फ्लू से मरने की पुष्टि नहीं हुई है, पर मौत की भारी संख्या को देखते हुए विशेषज्ञ इसी की आशंका जता रहे हैं.

केंद्र सरकार ने दलदली भूमि और पॉल्ट्री फार्म में होने वाली असामान्य मौतों पर नजर रखने के आदेश देने के साथ प्रोटोकॉल से संबंधित सलाह भी जारी की है. केरल ने 40 हजार बत्तखों-मुर्गियों को मारने का आदेश दिया है, जबकि हिमाचल प्रदेश ने कुछ हिस्सों में चिकन, अंडे और मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रभावित स्थलों और आर्द्रभूमि के एक किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू की गई है. मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जे. एन. कंसोटिया ने बताया, ”सभी आवश्यक प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं और पॉल्ट्री उद्योग पर सख्त नजर रखी जा रही है.”

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 5 जनवरी को कहा, ”हमें लोगों में जागरूकता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि वे मृत पक्षी को न छुएं और पक्षियों की मौत की सूचना अधिकारियों को दें, जिन्हें प्रोटोकॉल के अनुसार शवों का निपटान करना चाहिए. पॉल्ट्री में संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए.” राजस्थान के पशुपालन विभाग के मुख्य सचिव कुंजी लाल मीणा के अनुसार, सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा रहे हैं और जागरूकता के लिए सभी पॉल्ट्री फार्म मालिकों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस करने की योजना बनाई जा रही है.

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि 4 से 24 दिसंबर के बीच एशिया और यूरोप के 14 देशों में पॉल्ट्री में एवियन फ्लू के 74 नए प्रकोपों को अधिसूचित किया गया था. यह प्रकोप दुनिया भर में चिंता का कारण हैं, क्योंकि यह फैल सकता है, भले ही मनुष्यों में आसानी से नहीं फैले. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मौजूदा स्ट्रेन मनुष्यों में अधिक संक्रामक बनने के लिए खुद को परिवर्तित कर सकता है. मनुष्यों को संक्रमित करने वाले उप-प्रकारों में से एक एच5एन1 के लक्षण लोगों के ऊपरी श्वसन मार्ग में हल्के संक्रमण के रूप में दिखाई देता है, तब निमोनिया हो सकता है, जिससे सदमे और यहां तक कि मौत हो जाती है.

मुर्गीपालन के भारी नुक्सान को रोकना राज्य सरकारों के लिए प्राथमिकता है. कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि देश में मुर्गे की आबादी 72.9 करोड़ हो सकती है और बड़े पैमाने पर मुर्गियों के संहार के गंभीर आर्थिक नतीजे हो सकते हैं. वर्ष 2006 से 2015 के बीच, भारत ने एवियन फ्लू के 28 प्रकोपों को देखा और लगभग 72.4 लाख पक्षियों को मार डाला गया, तथा उस अवधि में लगभग 24.3 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में मुर्गीपालन करने वाले किसानों को दिए गए. हाल ही में देश में बर्ड फ्लू की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद, 2020 की पहली छमाही में हजारों पक्षियों को मार डाला गया.

राजस्थान की पशुपालन विभाग की विशेष सचिव आरुशी मलिक के मुताबिक, विशेषज्ञों की टीमों को स्थिति का आकलन करने भेजा गया है, खासकर अजमेर, भरतपुर पक्षी अभयारण्य और सांभर साल्ट लेक. राज्य के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन मोहन मीणा का कहना है कि वे पक्षी अभयारण्यों, बाघ अभयारण्यों और आर्द्रभूमि की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. मध्य प्रदेश में भी जल निकायों के आसपास जहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों देखे जाते हैं, सतर्कता बरती गई है.
—साथ में राहुल नरोन्हा

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