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जलंधर( vbnews24) 31 अगस्त 2020 कोविड -19 से प्रभावित मरीज़ों विशेषकर बहुत गंभीर और नाजुक मरीज़ों को जालंधर में बढिया इलाज के लिए जिला प्रशासन अब पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट आफ मैडीकल एजुकेशन और रिर्सच (पी.जी.आई.ऐम.आर) चंडीगढ के दो विशेषज्ञों की सेवाएं लेने जा रहा है।इस सम्बन्धित और ज्यादा जानकारी देते हुए अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (विकास) विशेष सारंगल, जो कि कोविड -19 से प्रभावित लैवल -3 के टेरेटरी अस्पतालों के इंचार्ज भी है ने बताया कि ऐनाथीसिया प्रमुख और डीन पी.जी.आई. प्रोफ़ैसर जी.डी.पूरी और एम.डी.ऐनाथीसिया और एसोसिएट प्रोफ़ैसर डा.कमल काजल कोविड प्रभावित मरीज़ों के बढिया इलाज को यकीनी बनाने के लिए जालंधर के डाक्टरों को मार्ग दर्शन प्रदान करने के लिए 24 घंटे उपलब्ध होंगे। सारंगल ने बताया कि इन दोनों विशेषज्ञों की तरफ से जिले में कोविड -19 से प्रभावित गंभीर मरीज़ों के क्लिनीकल प्रबंधन में सहयोग दिया जायेगा, जो कि मौत दर को घटाने में सहायक होगा। उन्होनें कहा कि इन दोनों विशेषज्ञों की तरफ से दी गई सलाह ऐमरजंसी मामलों में सुचारू ढंग से निपटने में भी लाभदायक सिद्ध होगी। सारंगल ने यह भी कहा कि उनकी तरफ से स्टेट हैल्थ सलाहकार डा.के.के.तलवाड़ को भी अपील की गई है, कि जिला प्रशासन को कोविड के गंभीर मामलों विशेषकर जिनका आई.सी.यू. में इलाज चल रहा है के इलाज में मदद पहुंचायी जाये। सारंगल ने कहा कि इस पर उनकी तरफ से तुरंत दो माहिरों को तैनात किया गया, जो डाक्टरों की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। उन्होनें बताया कि कोविड से लोगों की कीमती जान बचाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होनें बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से जालंधर में गंभीर मरीज़ा को स्वास्थ्य सुविधाएं देने में कोई कमी नहीं छोड़ी जायेगी। सारंगल ने बताया कि जिले में लैवल -3 के मरीज़ों के लिए सरकारी और प्राईवेट स्वास्थ्य संस्थायों में 248 बैंड मौजूद हैं। उन्होनें आगे बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से जिले में कोविड -19 को फैलने से रोकने के लिए चार टी जैसे कि ट्रेकिंग, ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीमैंट पर काम किया जा रहा है। सारंगल ने बताया कि यह समय की ज़रूरत है कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोविड -19 को फैलने से रोकने के लिए जारी हिदायतों जिस में मास्क पहनना, हाथ धोना और सामाजिक दूरी को बनाए रखने की पालना करने के इलावा कोविड के कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य संस्था के साथ संपर्क करना चाहिए।
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