नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने हरियाणा में ट्रैक्टर रैली रोके जाने पर विवादित बयान दिया है। जाखड़ ने कहा, ‘जिस तरह हमें हरियाणा में रोका गया, तो हम पाकिस्तान जाने के लिए बॉर्डर खोल देंगे।’

दरअसल, पंजाब कांग्रेस ने सोमवार को राज्य में तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन किया. पार्टी का आरोप है कि इन विधेयकों से किसान समुदाय ‘बर्बाद’ हो जाएगा. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘किसान विरोधी’ विधेयकों को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्र सरकार के पुतले जलाए।

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने फतेहगढ़ साहिब के बस्सी पठाना में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और राजग सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘ इन विधेयकों से किसान तबाह हो जाएंगे।’ जाखड़ ने वादा किया कि उनकी पार्टी किसान समुदाय के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

जाखड़ ने पंजाब की विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर हमला बोलते हुए कहा कि किसानों में प्रस्तावित विधेयकों के खिलाफ गुस्सा देखते हुए पार्टी ने ‘यू-टर्न’ लिया. उन्होंने कहा, ‘इससे पहले वे इन विधेयकों को हित में बताकर किसानों को गुमराह कर रहे थे।’ जाखड़ ने आगे कहा कि वह खुश हैं कि सभी किसान संगठन इन विधेयकों का विरोध करने के लिए साथ आए हैं।

किसान संगठनों ने इन विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को ‘पंजाब बंद’ का आह्वान किया है। होशियारपुर में राज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने शिअद नेता हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को ‘राजनीतिक पैतराबाजी’ करार देते हुए सवाल किया है कि उन्होंने तब क्यों नहीं पद छोड़ा था जब मोदी सरकार यह अध्यादेश लेकर आई थी। उन्होंने कहा, ‘हम सब किसानों के साथ हैं।’

गौरतलब है कि विपक्ष ने रविवार को राज्य सभा (Rajya Sabha) में हुए हंगामे के चलते सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने को लेकर सरकार पर हमला बोला तथा इस कदम के विरोध में संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। निलंबित किए गए आठ सांसदों में कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा), तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य शामिल हैं। उच्च सदन में कृषि संबंधी विधेयक को पारित किए जाने के दौरान ‘अमर्यादित व्यवहार’ के कारण इन सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ने वाले आठ सांसदों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण है और इस तानाशाह सरकार की उस मानसिकता को दर्शाती है जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नियमों का सम्मान नहीं करती। हम झुकने वाले नहीं हैं और हम इस तानाशाह सरकार के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक लड़ेंगें।’

निलंबन के खिलाफ कांग्रेस, माकपा, शिवसेना, जनता दल (सेक्यूलर), तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और समाजवादी पार्टी के सांसद संसद भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। उनके हाथों में ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘संसद की मौत’ लिखी तख्तियां थीं।

माकपा नेता इलामारम करीम ने कहा कि निलंबन से हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हम किसानों के साथ उनकी लड़ाई में साथ रहेंगे। उपसभापति ने कल संसदीय प्रक्रियाओं का गला घोंटा है। सांसदों के निलंबन ने भाजपा के कायर चहरे को उजागर कर दिया है।

आम आदमी पार्टी से सांसद संजय सिंह ने कहा, ‘देश के किसानों जाग जाओ। भाजपा की सरकार ने आपकी जिंदगी को अडाणी-अंबानी को गिरवी रख दी है। जाग जाओ और इस काले कानून का विरोध करो। हम संसद में प्रदर्शन कर रहे हैं और आप इसके बाहर करो।’

संजय ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के खिलाफ काले कानून को पारित किया है. हमें विधेयक का विरोध करने के लिए निलंबित किया गया है। इसलिए हम यहां धरने पर बैठे हैं और तब तक बैठे रहेंगे जब तक भाजपा सरकार आकर नहीं बताती कि क्यों लोकतंत्र का गला घोंटकर इस काले कानून को पारित किया गया है।

माकपा नेता इलामारम करीम, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आप के संजय सिंह और माकपा के केके रागेश के नाम निलंबित राज्य सभा के निलंबित सांसदों की सूची में शामिल हैं।

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